बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना 2023: ऑनलाइन आवेदन

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ( बालिका बचाओ, बालिकाओं को शिक्षित करो) भारत सरकार का एक अभियान है जिसका उद्देश्य जागरूकता पैदा करना और भारत में लड़कियों के लिए कल्याणकारी सेवाओं की दक्षता में सुधार करना है। यह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखण्ड, पंजाब, बिहार और दिल्ली में समूहों को दक्षित करता है।

NOTE:- भारत सरकार ने देशभर में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का गठन किया हैं।समिति जनवरी 2015 से “सेव गर्ल चाइल्ड” और “टू एजुकेट गर्ल चाइल्ड” को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित कर रही है। डॉक्टर राजेंद्र फड़के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक हैं।

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान 2023

22 जनवरी 2015 की सुबह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के पानीपत में एक मंच पर खड़े होकर दर्शकों से अपने बेटे और बेटियों के साथ समान व्यवहार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा “दिल में दर्द लेकर आज मैं आपके पास आया हूँ”। दुनिया जो इंसानियत की बात करती है, उसी दुनिया में माँ के गर्भ में ही एक बच्ची को मार दिया जाता है। Beti Bachao Beti Padhao Yojana, बाल लिंगानुपात में गिरावट और महिलाओं के सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के लिए है।

भारत में जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बाल लिंगानुपात 2001 में प्रति 1000 लड़कों पर 927 लड़कियां थी। जो 2011 में प्रति 1000 लड़कों पर गिरकर 918 हो गई। 2011 की जनसंख्या जनगणना में यह पता चलता है कि भारत 2011 के जनसंख्या अनुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 919 महिलाओं का है। लिंगानुपात 2011 जनगणना 2001 के आंकड़ों से नीचे की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ योजना कब शुरू की गई?

2015 में, भारत सरकार ने देश में लैंगिक भेदभाव और महिला सशक्तिकरण की चिंताओं को दूर करने के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की। Beti Bachao Beti Padhao Yojana का उद्देश्य नागरिको को लैगिंग पूर्वाग्रह के खिलाफ़ शिक्षित करना और लड़कियों के लिए कल्याणकारी सेवाओं की प्रभावकारिता में सुधार करना है। इसे 100  करोड़ रुपये की शुरुआती फंडिंग के साथ लॉन्च किया गया।

इस योजना को वर्ष 2015 में केवल 100 जिलों में आरंभ किया गया था। वर्ष 2015-16 में इस योजना के अंतर्गत 61 और जिले जोड़ गए। इस समय यह योजना देश के प्रत्येक जिले में संचालित की जा रही है, जिससे बेटियों के जीवन स्तर में सुधार एवं उनका भविष्य उज्जवल होता जा रहा है।

Beti Bachao Beti Padhao Highlights

योजना का नाम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना
विभाग का नाम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
स्वास्थ्य मंत्रालय
परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय का सयुंक्त अभियान
किसने शुरू कीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कब शुरू हुई 22 जनवरी 2015
किसने आरंभ कीभारत सरकार
लाभार्थीभारत के नागरिक
उदेश्य लिंगानुपात में सुधार करना
आधिकारिक वेबसाइट https://wcd.nic.in/bbbp-schemes

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का कारण

लिंग चयनात्मक गर्भपात या कन्या भ्रूण हत्या के कारण भारत के कुछ राज्यों में लड़कों के शिशुओं के विपरीत पैदा होने वाली लड़कियों के अनुपात में तेज गिरावट आई है। अल्ट्रासाउंड तकनीक से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में ही भ्रूण के लिंग का पता लगाना संभव बना दिया है। कई कारणों से बालिकाओं के साथ भेदभाव ने प्रौद्योगिकी के साथ मिलकर अल्ट्रासोनिक परीक्षण के दौरान मादा के रूप में पहचाने जाने वाले भ्रूण के गर्भपात में वृद्धि की है।

NOTE:- राज्यों में कन्या भ्रूण हत्या की दर बढ़ रही है। 2001 में जीवित जन्मों की दर 932 लड़कियों प्रति 1000 लड़कों पर थीं।जो 2011 तक गिरकर 918 हो गई। उम्मीद है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो 2021 तक लड़कियों की संख्या प्रति 1000 लड़कों पर 900 से कम हो जाएगी।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का प्रभाव

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने बताया कि यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रही। आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में लिंगानुपात में गिरावट आई है। मानव संसाधन विकास पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार बीतीय वर्ष 2016- 17 में योजना के लिए आवंटित कुल 43 करोड़ में से केवल 5,00,00,000 का ही सही उपयोग किया गया था।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014- 15 से 2018- 19 तक 56 फीसदी से ज्यादा फंड प्रचार पर खर्च किया गया। 25% से भी कम धनराशि जिलों और राज्यों को जारी की गई और सरकार ने 19% से अधिक धनराशि जारी नहीं की।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत परेशानियां

राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश राय ने कहा “जब स्कूलों को बंद कर दिया जाता है या दूर स्थित स्कूलों में विलय कर दिया जाता है”, तो स्कूल छोड़ने वाले अधिकांश छात्र लड़कियां होती है क्योंकि उनके माता पिता सुरक्षा चिंताओं के कारण उन्हें दूर भेजने के लिए तैयार नहीं होते हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 60 लाख बच्चे अभी भी ये स्कूल से बाहर है और प्राथमिक और माध्यमिक के बीच एक बड़ी ड्रॉपआउट दर है, इसलिए और स्कूल खोलने की आवश्यकता है।

इसके बजाय, पिछली राजस्थान सरकार ने स्कूलों को निजी क्षेत्र में जगह बनाने के लिए बंद कर दिया।राय ने कहा है कि यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है, जो यह कहते हैं कि बच्चों के पड़ोस में स्कूल होने चाहिए।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के मुख्य बिंदु

  • BBBP यानि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को भारत सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से प्रथम चरण में 100 जिलों में लागू किया गया। 
  • बेटियों के अधिकार, सम्मान एवं सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करने के लिए समय समय पर beti bachao beti padhao poster भी जारी के गए।
  • 23 राज्यों के लगभग 87 जिलें में लिंगानुपात राष्ट्रिय लिंगानुपात से कम था, जिसे पूर्ण करने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का सहारा लिया जा रहा है।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा बेटियों के जन्मोत्सव पर 5 पौधों का बृक्षारोपण के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • इस योजना के माध्यम से बेटियों के प्रति समाज में होने वाले लैंगिक भेद को समाप्त करना है।
  • बालिकाओं के होने वाले शोषण से बचाव व सही गलत का ज्ञान प्रदान करने का एक पहल Beti Bachao Beti Padhao Yojana है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इस योजना के बजटीय नियंत्रण और प्रशासन के लिए जिम्मेदार होगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के विशेषताएं

  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 22 जनवरी 2015 को आरंभ किया गया है।
  • इस योजना के तहत बालिकाओं के अस्तित्व, सुरक्षा और शिक्षा को सुनिश्चित किया जाएगा।
  • देश में लिंग अनुपात सुधार करने का प्रयास बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत किया जाएगा।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत भ्रूण हत्या को रोकने का प्रावधान जाएगा।
  • बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जाएंगे।
  • वर्ष 2015-16 में इस योजना के अंतर्गत देश के लगभग 61 और जिले जोड़ गए थे।
  • इस समय यह योजना देश के प्रत्येक जिले में संचालित की जा रही है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य

योजना के तहत प्रदान किए गए दिशा निर्देशों में एक जिला मजिस्ट्रेट या एक कलेक्टर को राज्य के महिला और बाल विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के परामर्श से एक जिला कार्य योजना, यह एक डीएपी तैयार करना होता है।

  1. बाल लिंगानुपात में सुधार
  2. लैकिंग सामान्यता और महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करें
  3. लिंग पक्षपाती, लिंग चयन उन्मूलन को रोकें
  4. बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करें
  5. बालिकाओं की शिक्षा और भागीदारी को प्रोत्साहित करें

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का लाभ

बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान के लाभ कुछ इस प्रकार है

  • युवा और नवविवाहित जोड़े:- गर्भवती और प्राथमिक वर्ग की स्तनपान कराने वाली माताएं
  • माध्यमिक युवा, किशोर( लड़कियां और लड़के) ससुराल वाले, चिकित्सा, चिकित्सक, खंड चिकित्सक, नर्सिंगहोम और नैदानिक केंद्र।
  • तृतीयक अधिकारी, फ्रंट लाइन सेगमेंट कार्यकर्ता, धार्मिक नेता, स्वेच्छिक संगठन, मीडिया, चिकित्सा संघ, बड़े पैमाने पर लोग

सर्वेक्षण नीती आयोग के सहयोग से एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किया जाएगा। इस सर्वेक्षण का प्राथमिक लक्ष्य कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों में योजना के क्रियान्वयन को मजबूत करने के तरीके को खोजना है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की रणनीतियाँ

  • बालिका और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समान मूल्य को बढ़ावा देने के लिए जागरुकता अभियान का कार्यान्वय किया गया है।
  • इस मुद्दे को सार्वजनिक विमर्श का विषय बनाना और उसे संशोधित करने रहना सुशासन का पैमाना बनेगा।
  • निम्न लिंगानुपात वाले जिलों की पहचान कर ध्यान देते हुए गहन और एकीकृत कार्रवाई करना।
  • ब्लॉक/जमीनी स्तर पर अंतर-क्षेत्रीय और अंतर-संस्थागत समायोजन को सक्षम करना।
  • महिलाओं एवं बालिकाओं की शिक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना एक पहल है
  • राज्य महिला संसाधन की समीक्षा राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग/समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा।
  • योजना के दिशा निर्देश के अनुसार जिला स्तरीय गतिविधियों के लिए जिले को प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार जिला कलेक्टर/ जिला मजिस्ट्रेट को धनराशि दो किस्तों में जारी की जाएगी।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत चिन्हित ग्रुप

इस योजना के अंतर्गत देश के निम्न ग्रुप को को टारगेट किया जाएगा. भारत सरकार द्वारा इन ग्रुप्स को तीन भागो में विभाजित किया गया है:

प्राथमिकयुवा एवं नवविवाहित जोड़े, गर्भवती एवं छोटे बच्चों की माताएं, माता-पिता
माध्यमिकयुवा, किशोर, चिकित्सक, निजी अस्पताल, नर्सिंग होम एवं डायग्नोस्टिक सेंटर
तृतीयअधिकारी, पंचायती राज संस्थान, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता, महिला स्वयं सहायता समूह/सामूहिक, धार्मिक नेता, स्वयंसेवी संगठन, मीडिया, चिकित्सा संघ, उद्योग संघ, आम जनता

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओअभियान के तहत निगरानी लक्ष्य

  • जन्म के समय बालिका लिंगानुपात में एक वर्ष में 2 अंक का सुधार।
  • बालिकाओं के लिए एक सुरक्षात्मक वातावरण को बढ़ावा देना और समीक्षा करना।
  • Beti Bachao Beti Padhao Yojana के तहत चयनित जिलों में प्रत्येक स्कूल में लड़कियों के लिए शौचालय प्रदान करना।
  • माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों का नामांकन 82% तक बढ़ाना ।
  • जिला स्तरीय अधिकारियों और कार्यकर्ता की क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की उपलब्धि

  • देश में लिंगानुपात की स्थिति पहले की तुलना में बढ़ी है
  • उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लड़कियों के लिए ड्रॉपआउट दर 2015 में 1.5% थी जो 2016 में घटकर 1% हो गई।
  • सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 59491 खाते खुले एवं और अधिक खुलने की संभावना है
  • देश के लगभग 104 जिलों में जन्म के समय बालक बालिका अनुपात में सुधार हुआ है।
  • 146 जिलों में संस्थागत प्रसव में सुधार देखने को मिला है।
  • शिक्षा एकीकृत जिला सूचना प्रणाली 2015-16 के अनुसार मध्यमिक शिक्षा में बेटियों का नामांकन 76% से बढ़कर 80.97% हुआ है।
  • इस योजना को ध्यान में रखते हुए स्कूल में लड़कियों के लिए शौचालय का निर्माण किया गया है
  • बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करने के मामले में सुधार दर्ज किया गया है

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का राजस्थान जिले में प्रभाव

महिला और बाल विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री वीरेंद्र कुमार ने इस साल 4 जनवरी को लोकसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में बेटी Beti Bachao Beti Padhao Yojana के तहत जारी किए गए धन के बारे में डेटा का खुलासा किया। जवाब से पता चला कि 31 दिसंबर 2018 तक, सरकार ने योजना शुरू होने के बाद से इसके लिए 648 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की थी।

इसमें से, 364 करोड़ की राशि या कम से कम 56% मीडिया गतिविधियों पर खर्च की गई थी। मंत्रालय के जवाब से पता चलता है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अधिकांश संसाधन पहल करने के बजाय परिवर्तन की धारणा बनाने पर केंद्रित थे।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के दिशा निर्देशों के अनुसार पहले चरण में, 2014 से 2015 तक योजना ने केंद्रित हस्तक्षेप और बहु क्षेत्रीय कार्रवाई के लिए कम बाल लिंग अनुपात के आधार पर 100 जिलों की पहचान की।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान राजस्थान राज्य की विशेष जानकारियां

केंद्र सरकार Beti Bachao Beti Padhao Yojana के लिए फंड भी प्रदान करती है।अधिकारियों के द्वारा दिए  गए जानकारी के अनुसार  2016- 17 में केंद्र ने 16.25 लाख रुपये की राशि जारी की, जिसमें से करीब दो लाख रुपये ही खर्च किए गए। अगले वित्तीय वर्ष में, जिले को 17.25 लाख रुपए मिले, और 10.55 लाख रुपये खर्च किए, जिनमें से अधिकांश का उपयोग आउटरिच गतिविधियों के लिए किया गया था। 2018 के अंत में कुल राशि 20,87,500 रुपये थी।

NOTE:- नवंबर 2018 में,MOWCD के उपनिदेशक ने मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक को एक पत्र लिखा था जिसमें बताया गया था कि सरकार ने इस योजना के लिए जिले को वर्ष 2018- 19 के लिए पहली किस्त के रूप में अतिरिक्त ₹4,12,500 मंजूर किए हैं।पत्र ने 2018- 19 में उपयोग की जाने वाली राशि 20,87,500 रुपये को भी पूर्ण मान्य किया।

IMPORTANT DETAILS:-

पुरस्कार के लिए जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई पुस्तिका में खेल प्रतियोगिताएं, कम्बल और खिलौना वितरण, वृक्षारोपण अभियान और उच्च स्कोर करने वाली छात्राओं को पगड़ी पहनाकर और उन्हें शहर के चारों ओर ले जा कर सम्मानित किया जाता है। बुकलेट में यह भी बताया गया है कि स्कूल में लड़कियों का नामांकन 2016-17 में 56,038 से बढ़कर 2018- 19 में 95,469 हो गया है।

  • ASER सेंटर की 2018 की शिक्षा की वार्षिक स्थिती रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में दो से 14 वर्ष की आयु के बीच की 5-10 प्रतिशत लड़कियों का किसी भी स्कूल में नामांकन नहीं था।
  • 2006 में यह आंकड़ा 20% था, इसके अलावा 15 से 16 साल के बीच की 20.1% लड़कियों ने स्कूल में दाखिला नहीं लिया, जो 2006 में 37:7 प्रतिशत थी।
  •  इसके अलावा 2011 की जनगणना ने राजस्थान को साक्षरता के मामले में 67.1 प्रतिशत के साथ तीसरे सबसे निचले स्थान पर रखा, और महिला साक्षरता के मामले में सबसे कम 52.7प्रतिशत है।
  •  इन आंकड़ों के बावजूद, MOWCD ने इस साल की शुरुआत में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत अच्छे प्रदर्शन के लिए राजस्थान को सम्मानित भी किया।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में आवेदन कैसे करे?

भारत सरकार द्वारा संचालित Beti Bachao Beti Padhao Scheme के तहत आवेदन करने के लिए निम्न स्टेप्स को फॉलो करे:

  • सबसे पहले महिला और बाल विकास मंत्रालय की Official Website पर जाएँ।
  • ऑफिसियल वेबसाइट का होम पेज इस प्रकार खुलेगा।
Beti Bachao Beti Padhao Scheme
  • होम पेज से Women Empowerment Scheme का ऑप्शन दिखाई देगा, उस ऑप्शन पर क्लिक करे।
  • इस option पर क्लिक करने के बाद इस प्रकार का पेज open होगा।
Beti Bachao Beti Padhao Yojana Registration
  • इस पेज से Beti Bachao Beti Padhao Yojana के विकल्प पर क्लिक करे।
  • इसके बाद एक आवेदन फॉर्म open होगा।
  • आवेदन फॉर्म में पूछे गए सभी जानकारी दर्ज करे और सम्बंधित दस्तावेज अपलोड करे।
  • सभी प्रक्रिया होने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करे।
  • इस प्रकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में आपका सफलतापूर्वक आवेदन हो जाएगा।

संपर्क विवरण

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना से सम्बंधित सभी आवश्यक जानकारी यहाँ दिया गया है. यदि अभी भी कोई परेशानी हो, तो निचे दिए गए एड्रेस पर संपर्क करे.

  • टोल फ्री नंबर: 011-23388612
  • ईमेल आईडी: pallavi.agarwal@gov.in
  • कांटेक्ट लिंक: https://wcd.nic.in/contactus

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